नियुक्ति प्रक्रिया

 

शिक्षुओं का चयनः

अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार यह नियोक्ता का उत्तरदायित्व है कि वे विधेयक के अंतर्गत अधिसूचना के अनुरूप अभ्यर्थियों का चयन जो शिक्षुता के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक मापदंड तथा चिकित्सा फिटनेस पूरा करते हों का चयन करें। तथापि, नियोक्ता यदि चाहे, बीओपीटी, कोलकाता शिक्षुओं के चयन में सहायता कर सकता है। कोई व्यक्ति शिक्षुता प्रशिक्षण के लिए तब किसी शिल्प (ट्रेड) में अर्हता प्राप्त नहीं होगा, यदि वहः

  • चौदह वर्ष की आयु का न हो तथा
  • य़था निर्धारित शैक्षणिक तथा चिकित्सीय मापदंड के अनुरुप न हो।

प्रशिक्षण निर्धारण 

  • शिक्षुओं को शिक्षुता प्रशिक्षण अवधि के दौरान किए गए कार्यों का लिखित विवरण, केंद्रीय शिक्षुता सलाहकार द्वारा विहित प्रपत्र में रखना होगा।
  • प्रत्येक नियोक्ता को अपने स्थापना में नियुक्त स्नातकों, तकनीकविदों तथा तकनीकविद् (व्यावसायिक) शिक्षुओं के द्वारा किए गए कार्यों तथा अध्ययन के संबंध में प्रत्येक तिमाही के अंत में, अनुलग्नक -6 में तिमाही प्रतिवेदन, निदेशक, बीओपीटी, कोलकाता को संप्रेषित करना होगा।
  • प्रत्येक स्नातक तकनीकविद् शिक्षु का नियोक्ता को समय-समय पर शिक्षुता प्रशिक्षण का प्रगति मूल्यांकन करना होगा।

नामांकन के लिए आवेदन (स्नातक / डिप्लोमा धारक / तकनीकी व्यावसायिक)

शिक्षुता कार्ड पंजीकरण (डाउनलोड)

नियोक्ता द्वारा पूर्णतः भरे हुए तथा हस्ताक्षरित (कार्यालय मुहर सहित) संविदा पंजीकरण कार्ड, शिक्षु (या उसके अभिभावक, अल्पवयस्क की स्थिति में) तथा प्रतिभू को संबंधित बीओपीटी, कोलकाता को पंजीकरण हेतु हस्ताक्षर तिथि के तीन महीनों के भीतर नियोक्ता द्वारा संप्रेषित करना चाहिए। तथापि, नियोक्ता के बेहतर हित में यह अपेक्षित है कि उनकेद्वारा संविदा कार्ड को प्रशिक्षण प्रारंभ होने की तिथि के तत्काल बाद (यथा 10 दिनों के भीतर) संप्रेषित किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षु के लिए संविदा का पंजीकरण यथाशीघ्र किया जा सके।

संविदा के पंजीकरण के पूर्व, बीओपीटी, कोलकाता शिक्षु तथा नियोक्ता द्वारा दिए गए विवरण का सत्यापन करेगा। पंजीकरण के बाद, प्रत्येक शिक्षु के लिए एक पंजीकरण संख्या का आवंटन किया जाता है तथा संविदा जिसमें पंजीकरण संख्या तथा पंजीकरण तिथि रहती है की दो प्रतियाँ नियोक्ता को वापस भेजी जाती है। विशिष्ट शिक्षु की पंजीकरण संख्या का जिक्र, भविष्य के सभी पत्राचारों तथा सरकार तथा सरकार के हिस्से के शिक्षुता राशि की प्रतिपूर्ति के लिए नियोक्ता द्वारा अवश्य हीं किया जाना चाहिए। तथापि, क्षेत्रीय केंद्रीय शिक्षुता सलाहकार तबतक किसी शिक्षु की शिक्षुता का पंजीकरण नहीं करेगा, जबतक कि वह संविदा में वर्णित शिक्षु के शिक्षुता प्रशिक्षण के रूप में निर्धारित ट्रेड में जैसा कि संविदा में विहित है के बारे में संतुष्ट नहीं होता। शिक्षु प्रपत्र संख्या 8 में एक घोषणा संप्रेषित करेगा कि उसने किसी सेवा / प्रशिक्षण में भाग नहीं लिया है।

 संविदा/संविदा के नोभेशन का संशोधन

 संविदा संशोधन के लिए प्रपत्र

 शिक्षुओं की नियुक्ति  

 शिक्षुता (संशोधन) अधिनियम, 1973 तथा 1986 के प्रावधानों के अनुरूप यह प्रत्येक नियोक्ता (राज्य तथा केंद्र सरकार के विभाग / उपक्रम / स्वायत्त तथा निजी संगठन) का सांविधिक दायित्व है कि वे अधिनियम के अंतर्गत अभियांत्रिकी  में स्नातक / डिप्लोमा धारकों तथा नियत ट्रेड में व्यावसायिक प्रमाण-पत्र धारकों को स्नातक / तकनीकविद् तथा तकनीकविद् (व्यावसायिक) शिक्षु को नियुक्त करे। किसी नियोक्ता द्वारा शिक्षुओं की नियुक्ति संख्या का निर्धारण विशिष्ट क्षेत्रीय शिक्षुता बोर्ड / व्यावहारिक प्रशिक्षण द्वारा किया जाएगा।  

कार्य घंटे

 स्नातक / तकनीकविद् तथा तकनीकविद् (व्यावसायिक) शिक्षु को प्रशिक्षण हेतु संलग्न स्थापना के विभाग की सामान्य कार्य-अवधि के अनुसार कार्य करना होगा। किसी भी शिक्षु को अतिरिक्त कार्यसमय (ओवरटाइम), शिक्षुता सलाहकार की अनुमति के बिना, जो ऐसी अनुमति तबतक नहीं देगा, जबतक वह संतुष्ट नहीं होता कि ऐसा अतिरिक्त कार्यसमय (ओवरटाइम) शिक्षु के प्रशिक्षण के हित में या लोकहित में है, अतिरिक्त कार्यसमय (ओवरटाइम) की अनुमति नहीं देगा।  

 छुट्टी की अनुमति

ऐसी स्थापनाओं में जहाँ समुचित छुट्टी नियम उपलब्ध नहीं हैं, कामगारों को एक वर्ष में विभिन्न प्रकार की ग्राह्य छुट्टियों की कुल संख्या 37 दिन से कम हो, शिक्षु निम्नांकित प्रकार की छुट्टियों का पात्र होगा तथा प्रत्येक प्रकार की छुट्टी के अंतर्गत विहित शर्तों के अधीन होगा।

 ·        आकस्मिक छुट्टी

  1. एक वर्ष में अधिकतम 12 दिनों की  आकस्मिक छुट्टी अनुमेय होगी।
  2. आकस्मिक छुट्टी के बीच का कोई सार्वजनिक अवकाश 12 दिनों की सीमा के अन्तगॅत गणना में नहीं लिया जाएगा।
  3. किसी वर्ष के दौरान अभुक्त आकस्मिक छुट्टी को व्यपगतित समझा जाएगा।
  4. आकस्मिक छुट्टी को चिकित्सा छुट्टी के साथ संयुक्त नहीं किया जाएगा। यदि आकस्मिक छुट्टी, चिकित्सा छुट्टी के पहले या बाद में ली गयी हो तो संपूर्ण छुट्टी को चिकित्सा छुट्टी या आकस्मिक छुट्टी समझा जाएगा, बशर्ते कि यह चिकित्सा छुट्टी या आकस्मिक छुट्टी, जैसा कि मामला हो के संबंध में निर्धारित अवधि से अधिक नहीं हो।
  5. अति तत्कालिकता के मामलों को छोड़कर, ऐस छुट्टी के लिए आवेदन सक्षम प्राधिकारी के समक्ष करनी होग तथा छुट्टी उपभोग के पूर्व संस्वीकृति प्राप्त करना होगा।

 ·        चिकित्सा छुट्टी 

  1. प्रत्येक वर्ष में पंद्रह दिनों की चिकित्सा छुट्टी, शिक्षु को जो अस्वस्थता के कारण कार्य नहीं कर सकता की स्वीकृति दी जा सकती है।
  2. चिकित्सा छुट्टी के दौरान कोई सार्वजनिक अवकाश, चिकित्सा छुट्टी समझा जाएगा तथा उपरोक्त उपवाक्य (1) में विहित सीमाओं में गणित होगा।
  3. नियोक्ता, शिक्षु से पंजीकृत चिकित्सक के द्वारा जारी चिकित्सा प्रमाण-पत्र उसके चिकित्सा छुट्टी के संबंध में प्रस्तुत करने के लिए कह सकता है। चिकित्सा प्रमाण-पत्र, तथापि छः दिनों से अधिक छुट्टी होने पर आवश्यक होगा।
  4. नियोक्ता किसी शिक्षु का विशेष चिकित्सीय परीक्षण कराने के लिए मुक्त होगा, यदि उसके पास यह विश्वास करने का पर्याप्त कारण हो कि शिक्षु वास्तव में बीमार नहीं है या उसकी बीमारी ऐसी नहीं है जो उसे उपस्थिति से रोके।

 ·        असाधारण छुट्टी

किसी शिक्षु को एक वर्ष में अधिकतम 10 दिनों के असाधारण छुट्टी की अनुमति उसके सभी आकस्मिक छुट्टी तथा चिकित्सा छुट्टी के निश्शेषित होने के बाद दी जा सकती है, यदि नियोक्ता आवेदित छुट्टी की वास्तविकता के आधार से संतुष्ट है।

 प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • नियोक्ता अपनी स्थापना में शिक्षु को विधेयक तथा उसमें सन्निहित नियमों के अंतर्गत तथा क्षेत्रीय केंद्रीय शिक्षुता सलाहकार के अनुमोदन से शिक्षुता प्रशिक्षण पाठ्यक्रम प्रदान करने के लिए उपयुक्त व्यवस्था करेगा।
  • प्रत्येक नियोक्ता को स्नातक / तकनीकविद् / तथा तकनीकविद् (व्यावसायिक) शिक्षुओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिपादित करना होगा तथा इसे संबंधित क्षेत्रीय केंद्रीय शिक्षुता सलाहकार से अनुमोदित कराना होगा।
  • विधेयक तथा उसमें सन्निहित नियमों के अंतर्गत शिक्षुओं के प्रशिक्षण के लिए नियोक्ता एक सुयोग्य व्यक्ति को प्रशिक्षण प्रभारी के रूप में रखने की व्यवस्था करेगा।

नियुक्ति प्रस्ताव

 शिक्षुता प्रशिक्षण अवधि की समाप्ति के पश्चात नियोक्ता को यह बाध्यकारी नहीं है कि वह शिक्षु को नियुक्ति प्रस्तावित करे, ना हीं शिक्षु को यह बाध्यकारी है कि वह नियोक्ता के अधीन किसी रोजगार को स्वीकारे।

टिप्पणीः तथापि शिक्षुता संविदा में ऐस शर्त है कि शिक्षुता प्रशिक्षण की सफल समाप्ति के पश्चात शिक्षु नियोक्ता की सेवा करेगा, ऐसी प्रशिक्षण समाप्ति के उपरांत नियोक्ता, शिक्षु को उपयुक्त रोजगार, क्षेत्रीय केंद्रीय शिक्षुता सलाहकार की अनुमति से संविदा में वर्णित ऐसी क्षमता तथा अवधि तथा ऐसे परिलब्धियों पर उपलब्ध कराने के लिए बाध्य होगा।

 आकस्मिक चोट के क्षतिपूरण के लिए नियोक्ता का उत्तरदायित्वः   

शिक्षु के रूप में प्रशिक्षण अवधि के दौरान किसी शिक्षु को व्यक्तिगत आकस्मिक चोट के लिए उसका नियोक्ता कामगार क्षतिपूरण अधिनियम, 1923 तथा अनुसूची में वर्णित संशोधनों के अधीन निर्धारित क्षतिपूरण प्रदान करने के लिए बाध्य है।

 शिक्षुता प्रतिपूर्ति

 न्यूनतम निर्धारित दरों पर 50% शिक्षुता हिस्से के सरकारी प्रतिपूर्ति का दावा, बकायों में, तिमाही आधार पर अर्थात अधिनियम के अन्तर्गत नियुक्त शिक्षुओं को निर्धारित दरों पर पहले नियोक्ता द्वारा भुगतान किया जाएगा तथा तदुपरांत तिमाही आधार पर दावा प्रस्तुत किया जाएगा। तिमाही निम्नांकित रूप में होने चाहिएः

अप्रैल से जून       - पहली तिमाही

जुलाई से सितम्बर   - दूसरी तिमाही

अक्तूबर से दिसम्बर  - तीसरी तिमाही

दिसम्बर से मार्च    - चौथी तिमाही

दावों को निर्धारित प्रपत्र सं. दावा जो तीन वर्ष पुराना है में किया जाना चाहिए।

 संविदा समापन

 यदि शिक्षुता संविदा का समापन किसी नियोक्ता के द्वारा उसके शर्तों तथा नियमों के अनुपालन में असफलता से होती है तो वैसे नियोक्ता को शिक्षु को उसके अंतिम तीन माह की शिक्षुता राशि के बराबर क्षतिपूरण अदायगी के लिए बाद्य होना पड़ेगा तथा यदि कथित समापन उपर्युक्त रीति में शिक्षु के असफलता के कारण हो तो संबंधित शिक्षु सलाहकार द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण लागत राशि वैसे शिक्षु या अल्पवयस्क की स्थिति में उसके अभिभावक द्वारा वसूला जाएगा। तथापि, शिक्षुता संविदा शिक्षु द्वारा बिना क्षतिपूरण के समाप्त किया जा सकता हैः

क.    यदि दोनों पक्ष संविदा को समय से पहले समाप्त करने के लिए राजी हों।

ख.    यदि शिक्षु को नियमित रोजगार प्राप्त हो जाय (नियुक्ति आदेश की प्रति प्रस्तुत करने पर)

ग.     यदि शिक्षु चिकित्सीय आधार पर अपना प्रशिक्षण जारी रखने में असमर्थ है (इस आशय का चिकित्सा प्रमाण-पत्र चिकित्सा अधिकारी जो सिविल सर्जन से कम पदस्थ न हो) से प्रस्तुत करने पर   

जहाँ शिक्षुता संविदा का समापन शिक्षु के द्वारा शर्तों तथा अनुबंधों के अनुपालन में असफलता से हो, वैसी दशा में शिक्षु अधिनियम के अंतर्गत किसी अन्य नियोक्ता के साथ एक और शिक्षुता संविदा के लिए पात्र नहीं होगा।

 

प्रमाण-पत्र निर्गम (डाउनलोड)

प्रत्येक स्नातक शिक्षु या तकनीकविद् शिक्षु या तकनीकविद् (व्यावसायिक) शिक्षु, जो संबंधित क्षेत्रीय बोर्ड की संतुष्टि के मुताबिक शिक्षुता प्रशिक्षण पूरा कर लेता है, को उस बोर्ड द्वारा एक निपुणता प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है।




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