वैज्ञानिक जनशक्ति समिति
की
संस्तुतियों के अनुसरण में, पूर्ववर्ती शिक्षा मंत्रालय, भारत
सरकार ने नए अभियांत्रिकी स्नातकों तथा अभियांत्रिकी में डिप्लोमा
धारकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से
“व्यावहारिक
वृत्तिकाग्राही प्रशिक्षण (पीटीएस) योजना“
के नाम से जाना जाता था की शुरूआत हुई। इस योजना के अंतर्गत
अभियांत्रिकी /प्रौद्योगिकी में स्नातक /
डिप्लोमा धारकों
की
सीमित संख्या को व्यावहारिक प्रशिक्षण हेतु
मासिक शिक्षुता पर उद्योगों में रखा जाता था। पीटीएस योजना पूर्णतः
स्वैच्छिक आधार पर थी तथा शिक्षुओं को देय शिक्षुता राशि पूर्णतः
भारत सरकार द्वारा वाहित
कीया जाती
थी
तथा प्रत्यक्षतः शिक्षा
मंत्रालय द्वारा शासित होता था। वर्ष 1973 में शिक्षुता अधिनियम को
अभियांत्रिकी / प्रौद्योगिकी में स्नातक / डिप्लोमा धारकों को इसके
कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत प्राप्त करने हेतु संशोधित किया गया।
1986 में शिक्षुता
अधिनियम को उच्च माध्यमिक (10+2) व्यावसायिक प्रमाण-पत्र धारकों को
योजना के अधिकार क्षेत्र में लाने के लिए पुनः संशोधित (शिक्षुता
अधिनियम, 1961 संशोधन) किया गया। शिक्षुओं के नूतन
कोटि को
तकनीकविद् (व्यावसायिक) शिक्षुता के नाम से जाना जाता है। स्नातकों
तथा तकनीकविद् शिक्षुता प्रशिक्षण के
आलावा, माध्यमिक तथा उच्च
शिक्षा विभाग, मानव
संसाधन
विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत
क्षेत्रीय शिक्षुता बोर्डों / व्यावहारिक प्रशिक्षण को तकनीकी
(व्यावसायिक) शिक्षुता प्रशिक्षण योजना तथा 14 अन्य विषयगत
क्षेत्रों को योजनांर्गत अधिसूचित कर जिम्मेदारी सौपी
गई
।
भारत सरकार द्वारा विशाल जनसमुदाय को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने
तथा आर्थिक वृद्धि प्राप्त करने हेतु
औध्योगीकरण पर बल दिया गया।
उद्योगों के लिए आवश्यक विभिन्न कोशलों की पहचान की गई। उद्योगों
की आवश्यकता
को
पूरा करने के लिए, भारत सरकार ने
उध्योगों को उपलव्ध सुविधाओं का उपयोग करने के निश्चय किया तकनीकविदों को प्रशिक्षित करने के लिए तथा इस
प्रकार शिक्षुता प्रशिक्षण ने रूप लिया तथा शिक्षुता अधिनियम, 1961
में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों से उतीर्णों के तकनीकी
अभियोग्यता के संवर्धन के लिए पारित हुआ। केंद्रीय शिक्षुता
काउंसिल की स्थापना सरकार को नीति तथा प्रक्रिया निर्माण में सुझाव
देने के लिए की गई।
अभ्यर्थियों
की योग्यता
शिक्षुता प्रशिक्षण के लिए
भर्ती होने वाले विद्यार्थियों की योग्यता निम्नांकित हैः
-
अभ्यर्थियों को
एआईसीटीई / संबंधित राज्यों के तकनीकी शिक्षा निदेशालय तथा
उच्च माध्यमिक विद्यालयों / जूनियर महाविद्यालयों तथा
प्रवेशिका शिक्षा के मान्यता प्राप्त संस्थानों से
अभियांत्रिकी / प्रौद्योगिकी में डिग्री या डिप्लोमा उतीर्ण
होना चाहिए।
-
अभ्यर्थियों को
एक वर्ष या इससे ज्यादा का कार्य अनुभव नहीं होना चाहिए।
-
अभ्यर्थियों
को अन्यत्र शिक्षुता प्रशिक्षण प्राप्त नहीं होना चाहिए।
अभ्यर्थियों को अर्हक परीक्षाओं को उतीर्ण किए हुए तीन वर्ष नहीं
होना चाहिए।
भर्ति
प्रक्रिया
इस
बोर्ड
द्वारा
आवंटित
सीटोको
किसी
भी
स्रोत
से
भरे
जाने
की
आवश्यकता
है
चाहे
समाचार पत्रो मे विझापन दे कर या
निकटवर्ती
क्षेत्र
के
तकनीकी
तथा
व्यावसायिक
संस्थानों
से
संपर्क
करके
या
इस
बोर्ड
से
अभ्यर्थियों
की
सूची
के
संबंध
में
संपर्क
करके
या
इस
बोर्ड
द्वारा
आयोजित
केंद्रीकृत
चयन
में
भाग
ले
के।
सैंडविच
पाठ्यक्रम
स्नातक
तथा
डिप्लोमा
अभियांत्रिकी
विद्यार्थियों
के
लिए
कुछ
तकनीकी
संस्थान
सैंडविच
पाठ्यक्रमों
का
संचालन
करते
हैं।
सभी
स्थापनाओं
को
इस
सैंडविच
पाठ्यक्रम
के
विद्यार्थियों
को
2-3
अर्धवार्षिक
पाठ्यक्रम
(सेमेस्टर)
तथा
2-3 चरणों
में
48 से
52 सप्ताहों
तक,
जब
इन
संस्थानों
द्वारा
आग्रह
किया
जाता
है
या
इस
बोर्ड
द्वारा
निर्देशित
किया
जाता
है,
भर्ती करने
की
आवश्यकता
होती
है।
इन
शिक्षुओं
की
संविदा
इस
बोर्ड
को
पजीकरन
हेतु,
जैसा
कि
उपर
पैरा
6 (अ)
में
दर्शाया
गया
है,
संप्रेषित
करना
पड़ता
है।
कंपनी
से
संविदा
दस्तावेज
स्वीकार
करने
से
पूर्व,
एक
महाविद्यालय
द्वारा
निर्गत
वैध
प्रमाण-पत्र
अवश्य
प्राप्त
करना
तथा
पंजीकरण
कार्ड
के
साथ
संप्रेषित
करना
पड़ता
है।
अभियांत्रिकी
के
क्षेत्र
अभियांत्रिकी
तथा
प्रौद्योगिकी
में
विषय
क्षेत्रों
की
सूची
व्यावसायिक
शिक्षुओं
के
लिए
निर्धारित
संव्यवसाय
की
सूची
प्रशिक्षण
की
अवधि
एक
वर्ष
मासिक
शिक्षुता
केंद्रीय
शिक्षुता
काउंसिल
द्वारा
संस्तुत
तथा
भारत
सरकार
द्वारा
अधिसूचना
सं.
जीएसआर
375 ई,
23
मार्च
2011
से
प्रभावी
वर्तमान
अधिसूचित
मासिक
शिक्षुता
दर
निम्नवत
हैः
|
क्रम सं. |
शिक्षुता
कोटि में रखने के लिए अभ्यर्थियों की न्यूनतम शैक्षणिक
योग्यता |
मासिक
शिक्षुता (रू.) |
|
1. |
अभियांत्रिकी
स्नातक शिक्षुता |
3560/- |
|
2. |
अभियांत्रिकी
महाविद्यालय स्नातक शिक्षुता (सैंडविच) के सैंडविच
पाठ्यक्रम
विद्यार्थी |
2530/- |
|
3. |
अभियांत्रिकी
तकनीकी शिक्षुता में डिप्लोमा धारक |
2530/- |
|
4. |
बहुशिल्प
(पोलिटेकनीक) महाविद्यालय तकनीकी शिक्षुता(सैंडविच) के
सैंडविच
पाठ्यक्रम
विद्यार्थी |
2070/- |
|
5. |
10+2
व्यावसायिक प्रमाण-पत्र धारक तकनीकी (व्यावसायिक) शिक्षुता |
1970/- |

भारत सरकार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, माध्यमिक तथा उच्चतर
शिक्षा विभाग
की शिक्षुता प्रशिक्षण योजना का महत्व यह है कि
शिक्षुता राशि का 50%
संबंधित क्षेत्रीय
बोर्डों के द्वारा प्रशिक्षण स्थापनाओं को दिया जाता है। तथापि,
प्रशिक्षण स्थापनाओं को यह अधिकार है कि न्यूनतम निर्धारित राशि से
अधिक दर पर शिक्षुता राशि दे सकते हैं।
सर्वेक्षण
तथा अधिसूचना
व्यावहारिक
प्रशिक्षण बोर्ड (बीओपीटी) के क्षेत्रीय केंद्रीय शिक्षुता
सलाहकार, पूर्व क्षेत्र में शिक्षुता (संशोधन) अधिनियम, 1973 तथा
1986 के अंतर्गत उद्योगों को अधिसूचना के लिए चिह्नित करते
हैं।
अधिसूचना के बाद उद्योगों को एक सूचना के द्वारा सूचित किया जाता
है तथा तदनुरूप उद्योग स्थापना के मूल्यांकन (फार्म-7) के लिए
सूचना उपलब्ध कराते हैं।
शिक्षुता
अधिनियम
1961, यथा संशोधित 1973 तथा 1986 की धारा 8
की उपधारा 3(अ) के
अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए निम्नांकित कारकों पर
विचार किया जाता हैः
-
उद्योग / संगठन
में नियुक्त तकनीकी लोगों की संख्या
-
उद्योग / संगठन
में उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधा